श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.8.39 
अतो मन्दतरं नाभ्यां चक्रं भ्रमति वै यथा।
मृत्पिण्ड इव मध्यस्थो ध्रुवो भ्रमति वै तथा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
अतः जैसे नाभि में चक्र के धीरे-धीरे घूमने के कारण वहाँ का मृत शरीर भी धीरे-धीरे घूमता है, उसी प्रकार ज्योतिषचक्र के मध्य में स्थित ध्रुव भी बहुत धीरे-धीरे घूमता है ॥39॥
 
Hence, just as due to the slow rotation of the wheel in the navel, the dead body there also rotates slowly, in the same way, the pole situated in the middle of the Jyotishchakra rotates very slowly. 39॥
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