श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.8.3 
सार्धकोटिस्तथा सप्त नियुतान्यधिकानि वै।
योजनानां तु तस्याक्षस्तत्र चक्रं प्रतिष्ठितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इसकी धुरी डेढ़ करोड़ सात लाख योजन लम्बी है जिस पर इसका पहिया लगा हुआ है॥3॥
 
Its axle is one and a half crore seven lakh yojanas long on which its wheel is fitted.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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