| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन » श्लोक 26 |
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| | | | श्लोक 2.8.26  | एवं पुष्करमध्येन यदा याति दिवाकर:।
त्रिंशद्भागन्तु मेदिन्यास्तदा मौहूर्तिकी गति:॥ २६॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार जब सूर्य पुष्कर द्वीप के मध्य में पहुँचकर पृथ्वी का एक-तिहाई भाग पार कर लेता है, तब उसकी गति एक मुहूर्त तक रहती है। [अर्थात् उतना भाग पार करने में जितना समय लगता है, उसे मुहूर्त कहते हैं।]॥26॥ | | | | In this manner, when the Sun reaches the centre of Pushkar Island and crosses one-thirtieth of the Earth, its speed lasts for one muhurta. [i.e. the time it takes to cross that much part is called a muhurta.]॥26॥ | | ✨ ai-generated | | |
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