श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.8.25 
आताम्रा हि भवन्त्यापो दिवा नक्तप्रवेशनात्।
दिनं विशति चैवाम्भो भास्करेऽस्तमुपेयुषि।
तस्माच्छुक्लाभवन्त्यापोनक्तमह्न:प्रवेशनात्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
दिन में रात्रि प्रवेश करने पर जल ताम्रवर्ण का दिखाई देता है, किन्तु सूर्य के अस्त होने पर उसमें दिन प्रवेश कर जाता है; अतः दिन के प्रवेश के कारण रात्रि में वह श्वेत हो जाता है ॥25॥
 
During the day, water appears copper-coloured when night enters, but when the sun sets, day enters it; therefore, due to the entry of day, it becomes white at night. ॥25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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