श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.8.23 
तेजसी भास्कराग्नेये प्रकाशोष्णस्वरूपिणी।
परस्परानुप्रवेशादाप्यायेते दिवानिशम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सूर्य और अग्नि का प्रकाश और ताप मिलकर दिन-रात बढ़ते रहते हैं ॥23॥
 
In this way the light and the heat of the sun and fire combine together and keep increasing day and night. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)