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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 21
श्लोक
2.8.21
प्रभा विवस्वतो रात्रावस्तं गच्छति भास्करे।
विशत्यग्निमतो रात्रौ वह्निर्दूरात्प्रकाशते॥ २१॥
अनुवाद
रात्रि में जब सूर्य अस्त होता है, तब उसका प्रकाश अग्नि में प्रवेश करता है; इसलिए उस समय दूर से अग्नि प्रज्वलित प्रतीत होती है ॥21॥
When the sun sets at night, its light enters the fire; therefore, at that time the fire appears to be lit from a distance. ॥ 21॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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