श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.8.18 
उदयास्तमनाभ्यां च स्मृते पूर्वापरे दिशौ।
यावत्पुरस्तात्तपति तावत्पृष्ठे च पार्श्वयो:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पूर्व और पश्चिम दिशाएँ सूर्य के उदय और अस्त होने से निर्धारित होती हैं। वास्तव में, जैसे सूर्य पूर्व में प्रकाश देता है, वैसे ही वह पश्चिम और पार्श्व दिशाओं [उत्तर और दक्षिण] में भी प्रकाश देता है। ॥18॥
 
The east and west directions are determined by the rising and setting of the Sun. In fact, just as the Sun gives light in the east, so does it give light in the west and the lateral directions [north and south]. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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