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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 17
श्लोक
2.8.17
उदितो वर्द्धमानाभिरामध्याह्नात्तपन् रवि:।
तत: परं ह्रसन्तीभिर्गोभिरस्तं नियच्छति॥ १७॥
अनुवाद
सूर्य उदय होने के पश्चात् मध्याह्न तक अपनी बढ़ती हुई किरणों के साथ चमकता है और फिर अपनी घटती हुई किरणों के साथ अस्त हो जाता है।*॥17॥
After rising, the Sun shines with its increasing rays till midday and then sets with its diminishing rays.*॥ 17॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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