| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन » श्लोक 16 |
|
| | | | श्लोक 2.8.16  | शक्रादीनां पुरे तिष्ठन् स्पृशत्येष पुरत्रयम्।
विकोणौ द्वौ विकोणस्थस्त्रीन्कोणान्द्वेपुरे तथा॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | मध्याह्न के समय सूर्यदेव इन्द्र आदि के किसी भी नगर पर प्रकाश डालते हुए तीन नगरों तथा दो दिशाओं (विदिशाओं) को प्रकाशित करते हैं। इसी प्रकार अग्नि आदि की किसी भी दिशा पर प्रकाश डालते हुए वे तीन दिशाओं तथा दो नगरों को (तथा समीपवर्ती दो दिशाओं को) प्रकाशित करते हैं। ॥16॥ | | | | At noon, the Sun, shining on any city of Indra, etc., illuminates three cities and two directions (Vidishas). Similarly, shining on any one of the directions of Agni, etc., he illuminates three directions and two cities [along with the two adjacent directions]. ॥16॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|