श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.8.120 
श्रुताऽभिलषिता दृष्टा स्पृष्टा पीताऽवगाहिता।
या पावयति भूतानि कीर्तिता च दिने दिने॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
जो प्रतिदिन अपने श्रवण, इच्छा, दर्शन, स्पर्श, पान, स्नान और स्तुति के द्वारा जीवों को पवित्र करती है। 120.
 
Who purifies the living beings every day by her hearing, desire, sight, touch, drinking, bathing and singing praises of Him. 120.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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