श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  2.8.119 
स्नानाद्विधूतपापाश्च यज्जलैर्यतयस्तथा।
केशवासक्तमनस: प्राप्ता निर्वाणमुत्तमम्॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
इस नदी के जल में स्नान करके पापों से मुक्त हुए तपस्वियों ने भगवान केशव में मन को एकाग्र करके परम निर्वाण पद प्राप्त किया है। 119.
 
By bathing in the water of this river the ascetics, who have become free from sins, have attained the highest state of nirvana by concentrating their minds on Lord Kesha. 119.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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