श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  2.8.118 
यस्यामिष्ट्वा महायज्ञैर्यज्ञेशं पुरुषोत्तमम्।
द्विज भूपा: परां सिद्धिमवापुर्दिवि चेह च॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! जिसके तट पर राजाओं ने यज्ञेश्वर भगवान् पुरुषोत्तम का महान् यज्ञ करके इस लोक और स्वर्ग में परम सिद्धि प्राप्त की है ॥118॥
 
Hey Dwija! On whose banks the kings have attained supreme success in this world and in heaven by performing great sacrifices to Yajneshwar Lord Purushottam. 118॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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