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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 113
श्लोक
2.8.113
सीता चालकनन्दा च चक्षुर्भद्रा चसंस्थिता।
एकैव या चतुर्भेदा दिग्भेदगतिलक्षणा॥ ११३॥
अनुवाद
चारों दिशाओं में जाकर वही एक ही सीता, अलकनंदा, चक्षु और भद्रा-चार प्रकार से हो जाती है ॥113॥
By going in all four directions the one and the same becomes Sita, Alaknanda, Chakshu and Bhadra – fourfold. ॥ 113॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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