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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 109
श्लोक
2.8.109
वामपादाम्बुजाङ्गुष्ठनखस्रोतोविनिर्गताम्।
विष्णोर्बिभर्ति यां भक्त्या शिरसाहर्निशं ध्रुव:॥ १०९॥
अनुवाद
भगवान विष्णु के बाएँ चरण के अँगूठे के कमल के समान उद्गम से निकली हुई गंगाजी को ध्रुव दिन-रात अपने मस्तक पर धारण करते हैं॥109॥
Dhruva wears Gangaji on his head day and night, which has emerged from the lotus-shaped source of the lotus-like toe of Lord Vishnu's left foot. 109॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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