श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  2.8.108 
तत: प्रभवति ब्रह्मन‍्सर्वपापहरा सरित्।
गङ्गा देवाङ्गनाङ्गानामनुलेपनपिञ्जरा॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! इसी विष्णुपद से देवी-देवताओं के समान वर्ण वाली श्रीगंगाजी उत्पन्न हुई हैं, मानो वे समस्त पापों को हरने वाली हैं॥108॥
 
Hey Brahman! It is from this Vishnupad that Sri Gangaji, who has the complexion of the gods and goddesses, is born as if she is the conqueror of all sins. 108॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd