श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  2.8.106 
ततश्चाज्याहुतिद्वारा पोषितास्ते हविर्भुज:।
वृष्टे: कारणतां यान्ति भूतानां स्थितये पुन:॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर गौ आदि पशुओं द्वारा उत्पन्न दूध और घी की आहुति से संतुष्ट हुए अग्निदेव प्राणियों की स्थिति के लिए पुनः वर्षा का कारण बनते हैं ॥106॥
 
Subsequently, Agnidev, who is satisfied with the offerings of milk and ghee produced by animals like cows, etc., is the cause of rain again for the condition of the living beings. 106॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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