श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.8.103 
दिवीव चक्षुराततं योगिनां तन्मयात्मनाम्।
विवेकज्ञानदृष्टं च तद्विष्णो: परमं पदम्॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
जो तल्लीन योगियों को आकाश में देदीप्यमान सूर्य के समान सबको प्रकाशित करने वाला प्रतीत होता है और जो केवल विवेक और ज्ञान से ही देखा जा सकता है, वह भगवान विष्णु का परम पद है ॥103॥
 
The one who appears to the engrossed yogis as the illuminator of all like the resplendent Sun in the sky and which is visible only through discrimination and knowledge, is the supreme position of Lord Vishnu. 103॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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