श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.8.101 
धर्मध्रुवाद्यास्तिष्ठन्ति यत्र ते लोकसाक्षिण:।
तत्सार्ष्टॺोत्पन्नयोगेद्धास्तद्विष्णो: परमं पदम्॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
जहाँ धर्म, ध्रुव आदि सांसारिक साक्षीगण योग से तरोताजा होकर भगवान के समान ऐश्वर्य को प्राप्त होकर निवास करते हैं, वहीं भगवान विष्णु का परम पद है ॥101॥
 
Where the worldly witnesses like Dharma, Dhruva etc., after being refreshed by Yoga, having received the same opulence of God, reside there, that is the supreme position of Lord Vishnu. 101॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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