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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 8: सूर्य, नक्षत्र एवं राशियोंकी व्यवस्था तथा कालचक्र, लोकपाल और गंगाविर्भावका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
2.8.10
काष्ठां गतो दक्षिणत: क्षिप्तेषुरिव सर्पति।
मैत्रेय भगवान्भानुर्ज्योतिषां चक्रसंयुत:॥ १०॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! भगवान सूर्य राशि सहित दक्षिण दिशा में प्रवेश करते हैं और छोड़े हुए बाण के समान बड़े वेग से चलते हैं।॥10॥
O Maitreya! Lord Sun along with the zodiac sign enters the southern direction and moves with great speed like an arrow shot. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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