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vishnu 2.7.41: वह ब्रह्म ही उनका (विष्णु का) परम धाम (परम स्वरूप) है। वह स्थिति सत् और असत् दोनों से पृथक है। उनसे अभिन्न होने के कारण यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत् उन्हीं से उत्पन्न हुआ है ॥ 41॥   |   vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.7.41 
तद‍्ब्रह्म तत्परं धाम सदसत्परमं पदम्।
यस्य सर्वमभेदेन यतश्चैतच्चराचरम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्म ही उनका (विष्णु का) परम धाम (परम स्वरूप) है। वह स्थिति सत् और असत् दोनों से पृथक है। उनसे अभिन्न होने के कारण यह सम्पूर्ण चर-अचर जगत् उन्हीं से उत्पन्न हुआ है ॥ 41॥
 
That Brahma is the supreme abode (the ultimate form) of Him (Vishnu). That position is distinct from both the real and the unreal. Being inseparable from Him, this entire animate and inanimate world has originated from Him. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)