vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त
»
श्लोक 28
श्लोक
2.7.28
दारुण्यग्निर्यथा तैलं तिले तद्वत्पुमानपि।
प्रधानेऽवस्थितो व्यापी चेतनात्मात्मवेदन:॥ २८॥
अनुवाद
जैसे लकड़ी में अग्नि और तिल में तेल विद्यमान रहता है, वैसे ही स्वयंप्रकाश आत्मा सर्वव्यापी मनुष्य में विद्यमान रहता है ॥28॥
Just as fire is present in wood and oil in sesame, so the self-illuminating soul is present in the all-pervasive human being. ॥28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×