vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त
»
श्लोक 18
श्लोक
2.7.18
ध्रुवसूर्यान्तरं यच्च नियुतानि चतुर्दश।
स्वर्लोक: सोऽपि गदितो लोकसंस्थानचिन्तकै:॥ १८॥
अनुवाद
सूर्य और ध्रुव के बीच जो चौदह लाख योजन का अन्तर है, उसे संसार की स्थिति का विचार करने वाले लोग स्वर्लोक कहते हैं ॥18॥
The fourteen lakh Yojana gap between the Sun and the Pole is called Swarlok by those who think about the world situation. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×