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vishnu 2.7.18: सूर्य और ध्रुव के बीच जो चौदह लाख योजन का अन्तर है, उसे संसार की स्थिति का विचार करने वाले लोग स्वर्लोक कहते हैं ॥18॥   |   vishnu अध्याय 2.7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 7: भूर्भुव: आदि सात ऊर्ध्वलोकोंका वृत्तान्त  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.7.18 
ध्रुवसूर्यान्तरं यच्च नियुतानि चतुर्दश।
स्वर्लोक: सोऽपि गदितो लोकसंस्थानचिन्तकै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सूर्य और ध्रुव के बीच जो चौदह लाख योजन का अन्तर है, उसे संसार की स्थिति का विचार करने वाले लोग स्वर्लोक कहते हैं ॥18॥
 
The fourteen lakh Yojana gap between the Sun and the Pole is called Swarlok by those who think about the world situation. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)