श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.6.48 
तदेव प्रीतये भूत्वा पुनर्दु:खाय जायते।
तदेव कोपाय यत: प्रसादाय च जायते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि वही वस्तु कभी प्रेम का कारण बनती है और कभी दुःख का; कभी क्रोध का कारण बनती है और कभी सुख का ॥48॥
 
Because the same thing sometimes becomes the cause of love and at other times it causes sorrow; at other times it becomes the cause of anger and at other times it gives happiness. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)