श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.6.45 
तस्मादहर्निशं विष्णुं संस्मरन्पुरुषो मुने।
न याति नरकं मर्त्य: सङ्क्षीणाखिलपातक:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे मुने! भगवान श्री विष्णु की अहर्निश स्मृति करने से मनुष्य पुनः नरक में नहीं जाता, क्योंकि उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं॥45॥
 
That's why O Mune! By remembering the aharnisha of Lord Shri Vishnu, a person does not go to hell again because all his sins are reduced. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)