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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 42
श्लोक
2.6.42
विष्णुसंस्मरणात्क्षीणसमस्तक्लेशसञ्चय:।
मुक्तिं प्रयाति स्वर्गाप्तिस्तस्य विघ्नोऽनुमीयते॥ ४२॥
अनुवाद
भगवान विष्णु का स्मरण करके समस्त पापों को जलाकर मनुष्य मोक्ष प्राप्त करता है, स्वर्ग की प्राप्ति उसके लिए बाधा मानी जाती है ॥42॥
By burning away all the sins by remembering Lord Vishnu, a person attains salvation, the attainment of heaven is considered a hindrance for him. 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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