श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.6.35 
सहस्रभागप्रथमा द्वितीयानुक्रमास्तथा।
सर्वे ह्येते महाभाग यावन्मुक्तिसमाश्रया:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे महाभाग्यवान! मोक्ष के साधक तक प्रथम प्राणी अन्य प्राणियों की अपेक्षा संख्या में हजार गुना अधिक होते हैं ॥ 35॥
 
O greatly fortunate one, up to the seeker of liberation, the first beings are a thousand times more in number than the others. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)