श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.6.32 
वर्णाश्रमविरुद्धं च कर्म कुर्वन्ति ये नरा:।
कर्मणा मनसा वाचा निरयेषु पतन्ति ते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो लोग मन, वचन या कर्म से वर्णाश्रम-धर्म के विपरीत आचरण करते हैं, वे नरक में जाते हैं ॥ 32॥
 
Those who act contrary to their Varnashrama-Dharma by thought, word or deed, go to hell. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)