श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.6.31 
यथैव पापान्येतानि तथान्यानि सहस्रश:।
भुज्यन्ते तानि पुरुषैर्नरकान्तरगोचरै:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ऊपर वर्णित पापों के समान और भी हजारों पाप हैं; मनुष्य विभिन्न नरकों में इन पापों का फल भोगते हैं ॥31॥
 
There are thousands of other sins like the ones mentioned above; men suffer the consequences of these sins in various hells. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)