श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.6.30 
एते चान्ये च नरका: शतशोऽथ सहस्रश:।
येषु दुष्कृतकर्माण: पच्यन्ते यातनागता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ये तथा अन्य सैकड़ों-हजारों नरक हैं जिनमें दुष्ट लोग नाना प्रकार की यातनाएँ भोगते हैं ॥30॥
 
Thus, there are these and hundreds and thousands of other hells in which evil-doers suffer various kinds of tortures. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)