Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 2.6.26-27: जो अकारण ही वनों को काटता है, वह असिपत्रवन नामक नरक में जाता है। चरवाहे और शिकारी वाहिनीज्वलनरक (अग्नि-अग्नि-अग्नि) नामक नरक में पड़ते हैं। और हे ब्राह्मण! जो मिट्टी के बर्तनों या ईंटों में अग्नि डालकर उन्हें पकाते हैं, वे भी उसी (अग्नि-अग्नि-अग्नि-अग्नि-अग्नि) नरक में जाते हैं॥ 26-27॥ | vishnu अध्याय 2.6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन । vishnu अंश 2: द्वितीय अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अकारण ही वनों को काटता है, वह असिपत्रवन नामक नरक में जाता है। चरवाहे और शिकारी वाहिनीज्वलनरक (अग्नि-अग्नि-अग्नि) नामक नरक में पड़ते हैं। और हे ब्राह्मण! जो मिट्टी के बर्तनों या ईंटों में अग्नि डालकर उन्हें पकाते हैं, वे भी उसी (अग्नि-अग्नि-अग्नि-अग्नि-अग्नि) नरक में जाते हैं॥ 26-27॥
He who cuts down forests without any reason goes to the hell of Asipatravan. Shepherds and hunters fall into the hell of Vahinijwalanarak (fire-fire-fire). And O Brahmin! Those who put fire in earthen pots or bricks to bake them, they also go to that (fire-fire-fire-fire-fire)॥ 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥