vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
2.6.17
करोति कर्णिनो यश्च यश्च खड्गादिकृन्नर:।
प्रयान्त्येते विशसने नरके भृशदारुणे॥ १७॥
अनुवाद
जो मनुष्य करणी नामक बाण बनाते हैं और जो तलवार आदि अस्त्र बनाते हैं, वे विषासन नामक अत्यन्त भयंकर नरक में गिरते हैं ॥17॥
Those men who make the arrows called Karni and those who make weapons like swords, fall into the most dreadful hell called Vishasan. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×