श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 6: भिन्न-भिन्न नरकोंका तथा भगवन्नामके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.6.11 
साध्वीविक्रयकृद‍्बन्धपाल: केसरिविक्रयी।
तप्तलोहे पतन्त्येते यश्च भक्तं परित्यजेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सती स्त्री को बेचने वाला, कारागार का रक्षक, घोड़ा बेचने वाला और भक्त का परित्याग करने वाला - ये सब लोग गरम रक्तमय नरक में पड़ते हैं ॥11॥
 
The seller of a sati woman, the prison keeper, the horse seller and the one who abandons a devotee - all these people fall into the hot bloody hell. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)