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श्लोक 2.5.27  |
तेनेयं नागवर्येण शिरसा विधृता मही।
बिभर्ति मालां लोकानां सदेवासुरमानुषाम्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| वे महासर्प शेषजी इस पृथ्वी को अपने सिर पर धारण किए हुए हैं, जो स्वयं देवता, दानव और मनुष्य सहित सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड (पाताल आदि) को धारण किए हुए हैं॥27॥ |
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| That great serpent Sheshaji is holding this earth on his head, who himself is holding the entire universe (underworld etc.) including the gods, demons and humans. 27॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥ |
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