vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन
»
श्लोक 20
श्लोक
2.5.20
स बिभ्रच्छेखरीभूतमशेषं क्षितिमण्डलम्।
आस्ते पातालमूलस्थ: शेषोऽशेषसुरार्चित:॥ २०॥
अनुवाद
और भगवान् शेष, जो सम्पूर्ण देवताओं द्वारा पूजित हैं, अशेष पृथ्वी को मुकुट के समान धारण किए हुए पाताल में विराजमान हैं॥20॥
And Lord Shesha, who is worshiped by all the gods, is seated in the underworld holding the Asesh Earth as a crown. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×