श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 5: सात पाताललोकोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.5.18 
लाङ्गलासक्तहस्ताग्रो बिभ्रन्मुसलमुत्तमम्।
उपास्यते स्वयं कान्त्या यो वारुण्या च मूर्त्तया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिनके हाथों में हल और मूसल है और जिनकी पूजा स्वयं शोभा और वारुणी देवियाँ करती हैं ॥18॥
 
Who holds a plough and a fine pestle in his hands and who is worshipped by the goddesses Shobha and Varuni themselves in the form of Him. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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