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vishnu 2.4.94: वहाँ लोकालोक पर्वत है जो दस हजार योजन विस्तार वाला है। वह पर्वत भी उतने ही हजार योजन ऊँचा है॥ 94॥   |   vishnu अध्याय 2.4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.4.94 
लोकालोकस्ततश्शैलो योजनायुतविस्तृत:।
उच्छ्रायेणापि तावन्ति सहस्राण्यचलो हि स:॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ लोकालोक पर्वत है जो दस हजार योजन विस्तार वाला है। वह पर्वत भी उतने ही हजार योजन ऊँचा है॥ 94॥
 
There is the Lokalok mountain which is ten thousand yojanas in extent. That mountain is also the same thousand yojanas in height.॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)