श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.4.93 
स्वादूदकस्य परितो दृश्यतेऽलोकसंस्थिति:।
द्विगुणा काञ्चनी भूमि: सर्वजन्तुविवर्जिता॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
मीठे जल वाले समुद्र के चारों ओर समुद्र से भी दुगुनी स्वर्णिम भूमि दिखाई देती है, जो मनुष्यों और प्राणियों से रहित है ॥93॥
 
Around the sweet water ocean there appears a land twice as golden as the ocean, devoid of human habitations and devoid of all living creatures. ॥93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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