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श्लोक 2.4.92  |
भोजनं पुष्करद्वीपे तत्र स्वयमुपस्थितम्।
षड्रसं भुञ्जते विप्र प्रजा: सर्वा: सदैव हि॥ ९२॥ |
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| अनुवाद |
| हे ब्राह्मण! पुष्कर द्वीप में सब लोग सदा अपने द्वारा [बिना किसी प्रयास के] प्राप्त होने वाले षट्स्वादिष्ट भोजन का ही सेवन करते हैं॥92॥ |
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| O Brahmin, in the island of Pushkar all the people always eat the six-taste food that is obtained by themselves [without any effort]. ॥92॥ |
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