श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.4.88 
पयांसि सर्वदा सर्वसमुद्रेषु समानि वै।
न्यूनातिरिक्तता तेषां कदाचिन्नैव जायते॥ ८८ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त समुद्रों में जल सदैव एक समान रहता है; उसमें कभी न्यूनता या अधिकता नहीं होती ॥88॥
 
There is always the same amount of water in all the oceans; there is never any shortage or excess in it. ॥ 88॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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