श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.4.86 
स्वादूदकेनोदधिना पुष्कर: परिवेष्टित:।
समेन पुष्करस्यैव विस्तारान्मण्डलं तथा॥ ८६ ॥
 
 
अनुवाद
पुष्कर द्वीप चारों ओर से अपने ही आकार के, वृत्त के समान, मीठे पानी के समुद्र से घिरा हुआ है। 86.
 
The island of Pushkara is surrounded on all sides by a sea of ​​fresh water of the same size as itself, like a circle. 86.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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