श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.4.84 
सर्वर्तुसुखद: कालो जरारोगादिवर्जित:।
धातकीखण्डसंज्ञेऽथ महावीरे च वै मुने॥ ८४ ॥
 
 
अनुवाद
हे मुने! महावीर और धातकीखण्ड नामक उन वर्षों में समय सब ऋतुओं में सुखद रहता है, शीत और रोग से रहित रहता है ॥84॥
 
Hey Mune! In those years called Mahavir and Dhataki-Khand, the time remains pleasant in all the seasons and is free from cold and disease. 84॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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