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श्लोक 2.4.81  |
सत्यानृते न तत्रास्तां द्वीपे पुष्करसंज्ञिते।
न तत्र नद्य: शैला वा द्वीपे वर्षद्वयान्विते॥ ८१ ॥ |
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| अनुवाद |
| उस पुष्कर द्वीप में जो दो भागों में विभक्त है, सत्य और असत्य का व्यवहार नहीं है और न ही उसमें पर्वत और नदियाँ हैं। 81. |
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| In that Pushkar island which is divided into two parts, there is no practice of truth and falsehood and neither are there mountains and rivers in it. 81. |
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