श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.4.80 
महावीरं बहिर्वर्षं धातकीखण्डमन्तत:।
मानसोत्तरशैलस्य देवदैत्यादिसेवितम्॥ ८० ॥
 
 
अनुवाद
मानसोत्तर पर्वत के बाहर महावीरवर्ष है और भीतर धातकीखण्ड है। उनमें देवता और दानव आदि निवास करते हैं ॥80॥
 
Mahaviravarsha is on the outside of Manasottara mountain and Dhataki-khand is on the inside. Gods and demons etc. reside in them. 80॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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