श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.4.79 
अधमोत्तमौ न तेष्वास्तां न वध्यवधकौ द्विज।
नेर्ष्यासूया भयं द्वेषो दोषो लोभादिको न च॥ ७९ ॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! उनमें न तो अच्छा-बुरा, न मारनेवाला-मारनेवाला आदि विरोधी भाव होते हैं, न वे ईर्ष्या, द्वेष, भय, द्वेष और लोभ के दोषी होते हैं। 79॥
 
Hey Dwija! There are no opposing feelings like good-bad or killer-killer etc. in them, nor are they guilty of jealousy, envy, fear, malice and greed. 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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