श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 64-65
 
 
श्लोक  2.4.64-65 
तत्र पुण्या जनपदाश्चातुर्वर्ण्यसमन्विता:।
नद्यश्चात्र महापुण्या: सर्वपापभयापहा:॥ ६४॥
सुकुमारी कुमारी च नलिनी धेनुका च या।
इक्षुश्च वेणुका चैव गभस्ती सप्तमी तथा॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
वह चातुर्वर्ण्य और सुकुमारी, कुमारी, नलिनी, धेनुका, इक्षु, वेणुका और गभस्ति- इन सात पवित्र नदियों से युक्त अत्यन्त पवित्र देश है, जो समस्त पाप और भय को दूर करती हैं ॥64-65॥
 
There is a very sacred country with Chaturvarnya and seven holy rivers – Sukumari, Kumari, Nalini, Dhenuka, Ikshu, Venuka and Gabhasti, which remove all sin and fear. 64-65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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