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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन
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श्लोक 63
श्लोक
2.4.63
शाकस्तत्र महावृक्ष: सिद्धगन्धर्वसेवित:।
यत्रत्यवातसंस्पर्शादाह्लादो जायते पर:॥ ६३॥
अनुवाद
वहाँ सिद्धों और गन्धर्वों द्वारा सेवित एक बहुत ही महान् शाक वृक्ष है, जिसकी वायु का स्पर्श करने से हृदय में अपार आनन्द उत्पन्न होता है ॥63॥
There is a very great vegetable tree served by Siddhas and Gandharvas, touching whose air creates immense joy in the heart. 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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