श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.4.54 
नदीर्मैत्रेय ते तत्र या: पिबन्ति शृणुष्व ता:।
सप्तप्रधाना: शतशस्तत्रान्या: क्षुद्रनिम्नगा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! वहाँ जिन नदियों का जल पिया जाता है, उनका वर्णन सुनो। उस द्वीप में सात बड़ी और सैकड़ों छोटी नदियाँ हैं ॥54॥
 
O Maitreya! Listen to the description of the rivers whose water is drunk there. There are seven major and hundreds of other minor rivers in that island. ॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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