श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  2.4.41-42 
विद्रुमो हेमशैलश्च द्युतिमान् पुष्पवांस्तथा।
कुशेशयो हरिश्चैव सप्तमो मन्दराचल:॥ ४१॥
वर्षाचलास्तु सप्तैते तत्र द्वीपे महामुने।
नद्यश्च सप्त तासां तु शृणु नामान्यनुक्रमात्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! उस द्वीप में सात पर्वत हैं - विद्रुम, हेमशैल, द्युतिमान, पुष्पवान, कुशेशाय, हरि और सातवाँ मंदराचल। तथा उसमें सात ही नदियाँ हैं, उनके नाम क्रमशः सुनो -॥41-42॥
 
Oh great sage! In that island there are seven mountains – Vidrum, Hemshail, Dyutiman, Pushpavan, Kusheshaya, Hari and the seventh Mandarachal. And there are only seven rivers in it, listen to their names respectively -॥ 41-42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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