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vishnu 2.4.40: वे अपने प्रारब्ध की प्राप्ति के लिए शास्त्रविधि का पालन करते हुए वहाँ कुशद्वीप में ही ब्रह्मास्वरूप जनार्दन की पूजा के द्वारा अपने प्रारब्ध का फल देने वाले अति अहंकार का नाश करते हैं ॥40॥   |   vishnu अध्याय 2.4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन   ।   vishnu अंश 2: द्वितीय अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.4.40 
यथोक्तकर्मकर्तृत्वात्स्वाधिकारक्षयाय ते।
तत्रैव तं कुशद्वीपे ब्रह्मरूपं जनार्दनम्।
यजन्त: क्षपयन्त्युग्रमधिकारफलप्रदम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वे अपने प्रारब्ध की प्राप्ति के लिए शास्त्रविधि का पालन करते हुए वहाँ कुशद्वीप में ही ब्रह्मास्वरूप जनार्दन की पूजा के द्वारा अपने प्रारब्ध का फल देने वाले अति अहंकार का नाश करते हैं ॥40॥
 
While doing the scriptures for the sake of achieving their destiny, there in Kushdweep itself, they destroy the extreme ego which gives the result of their destiny through the worship of Janardan in the form of Brahma. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)