श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 4: प्लक्ष तथा शाल्मल आदि द्वीपोंका विशेष वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.4.33 
एष द्वीप: समुद्रेण सुरोदेन समावृत:।
विस्ताराच्छाल्मलस्यैव समेन तु समन्तत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
यह द्वीप अपने ही समान विस्तारवाले मदिरा के समुद्र से सब ओर से पूर्णतया घिरा हुआ है ॥33॥
 
This island is completely surrounded on all sides by a sea of ​​wine of the same extent as itself. ॥ 33॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas