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श्लोक 2.4.33  |
एष द्वीप: समुद्रेण सुरोदेन समावृत:।
विस्ताराच्छाल्मलस्यैव समेन तु समन्तत:॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| यह द्वीप अपने ही समान विस्तारवाले मदिरा के समुद्र से सब ओर से पूर्णतया घिरा हुआ है ॥33॥ |
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| This island is completely surrounded on all sides by a sea of wine of the same extent as itself. ॥ 33॥ |
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